विभाग को अचकमा दे कर रहे शराब की सप्लाई
मप्र से आ रही अवैध शराब, डोंगरगढ़ बना ट्रांजिट रूट

राजनांदगांव। शहर सहित जिलेभर में अवैध शराब पर लगाम लगाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे है. बावजूद इसके शराब की अवैध बिक्री चल रही है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कोचियों ने अपना पैटर्न बदलते हुए काम शुरू कर दिया है. जिससे अब आबकारी और पुलिस विभाग इन्हें पकड़ने में असमर्थ नजर आ रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले कोचिए शराब भट्टी से पेटी- पेटी शराब ले जाते थे. लेकिन अब पैटर्न बदलते हुए कोचिए टूकड़ों में शराब ले जा रहे है. जिसे पकड़ने में पुलिस और आबकारी विभाग नाकाम साबित हो रही है.
- ऐसे बदला पैटर्न
- छत्तीसगढ़ आबकारी नीति 2025-26 के अनुसार, एक व्यक्ति एक बार में अधिकतम 6 बोतल (या 12 अद्धी या 24 पव्वा) शराब खरीद और रख सकता है, जिसमें देशी और अंग्रेजी शराब की कुल मात्रा 5 बल्क लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, और यह नियम 1 अप्रैल 2025 से लागू है। इसी का फायदा उठाते हुए कोचिएं शहर की आठ शराब दुकान से चार से पांच लोगों को रखकर शराब मंगवा रहे है। दिन में एक व्यक्ति अलग- अलग शराब दुकान में जाकर शराब ले रहा है. जिससे उक्त व्यक्ति की कोचिएं के रूप में पहचान भी नहीं हो पा रही है और कोचियों का काम धड़ल्ले से चल रहा है. जिसमें कोचिएं रोजाना 5 से 10 हजार रूपए की अवैध कमाई कर रहे है.
- मप्र से आती है डोंगरगढ़ के रास्ते अवैध शराब
- मप्र की शराब को डोंगरगढ़ के रास्ते आसानी से शहर सहित छत्तीसगढ़ के दुर्ग, भिलाई और आसपास के क्षेत्र में आ रही है. रोजना डोंगरगढ़ और चिचोला के रास्ते से बड़े पैमाने पर शराब की खेप पहुंच रही है. जिसे होटल, ढाबा और लाज तक पहुंचाया जा रहा है. इस सब का सेंटर पार्इंट दुर्ग- भिलाई बना हुआ है. पूरा माल पहले दुर्ग आता है. फिर यहां से टूकड़ों में डिमांग के अनुसार अलग- अलग जिलों में भेजा जाता है. शराब कोचियों के सरगना का नाम सामने आने के बाद भी पुलिस की सुस्त कार्यवाही से इनके हौसले बूलंद है. इसी कारण जिले में अवैध तस्करी का खेल लगातार चल रहा हैं. अवैध शराब को खपाने भी कारीडोर तैयार किया जा चुका है। जिसे ध्वस्त करना पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है. इससे पहले शहर में मप्र की ब्रांडेड शराब पकड़ाई थी, जांच में पता चला कि संगठित रूप से कोचिए मप्र की शराब को आसानी से ट्रेन के रास्ते शहर तक लाते थे. इस प्रकरण में आबकारी विभाग ने शराब मंगाने वाले लोगों का अब तक खुलासा नही किया है. सूत्रो की माने तो डोंगरगढ़ और बागनदी बार्डर में बड़े पैमाने पर कोचिया सक्रिय है, जो आर्डर लेने के बाद आसानी से डोंगरगढ़ के रास्ते राजनांदगांव, दुर्ग- भिलाई सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शराब की तस्करी कर रहे हैं। कोचिए के हौसले इतने बुलंद है कि, अवैध शराब को सड़क रास्ते के आलावा ट्रेन के माध्यम भी पहुंचा रहे है। पुलिस ने पहले भी ट्रेन से शराब तस्करी के मामले को पकड़ा था. लेकिन कई मामलों में आज तक पुलिस मुख्य आरोपी तक नहीं पहुंच पाई है या यह कहे कि कही ना कही राजनीतिक दबाव में मामला ही दबा दिया गया है.
- भिलाई के बड़े सप्लाई को पकड़ने में पुलिस नाकाम
- राजनांदगांव सहित दुर्ग- भिलाई और छत्तीसगढ़ में शराब की अवैध सप्लाई करने वाले एक बड़े सप्लाई को पकड़ने में पुलिस अब तक नाकाम रही है. हाल ही में राजनांदगांव पुलिस ने जो शराब पर कार्रवाई की थी. उसमें उक्त बड़े सप्लायर का नाम सामने आया है. सूत्र बता रहे है कि विभाग में कई विभीषण है, जो सप्लायर तक की कड़ी है और कार्रवाई से पहले ही सप्लायर तक बात पहुंच जाती है. सूत्र बता रहे है कि अभी हाल ही मेें डोंगरगढ़ में पकड़ाई शराब का इनपुट देने वाले एक कर्मी ने जो मात्रा बताई थी, उसमें भी खेल हो गया. हालांकि कर्मी द्वारा जो बताया गया था उससे पहले ही विभीषणों ने जानकारी दे दी. लेकिन शराब की मात्रा इतनी ज्यादा था कि अवैध शराब में लिप्त कारोबारियों ने पूरा मामला रफादफा नहीं कर पाए.
- डोंगरगढ़ में शराब का बड़ा कारोबार
- राजनांदगांव जिले का डोंगरगढ़ शराब के मामले में हाट स्पार्ट बना हुआ है. अब तक दो बड़ी कार्रवाई पुलिस द्वारा की गई है. जिसमें पहले कार्रवाई कलवारी में हुई थी. जिसके मुख्य आरोपी अब तक पकड़ से बाहर है. वहीं दूसरी कार्रवाई मुसराखुर्द में की गई है. जिसमें बड़ी मात्रा में नकली स्टीकर, लेबल और अन्य सामान जप्त किए गए थे. इन सबके बीच एक बड़ी बात सामने निकल का आ रही है. जिसमें पुलिस ने मात्र 161 नग जम्मू स्पेशल व्हीस्की और 187 नग बाम्बे स्पेशनल व्हीस्की बरामद की गई है. जबकि 1860 नग नकली स्टीकर और अन्य ब्रांड के लेबल सहित अन्य सामान मिले थे. शराब की मात्रा कम और स्टीकर ज्यादा मिलना भी सोचनीय विषय है.

